• arab league | |
अरब: Arabian billion Saudi milliard one thousand | |
संघ: association club fellowship group Union phylum | |
अरब संघ अंग्रेज़ी में
[ arab samgha ]
अरब संघ उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
- And so on. In fact, every effort at forming an Arab union failed - in particular the United Arab Republic between Egypt and Syria (1958-61) but also lesser attempts such as the Arab Federation (1958), the United Arab States (1958-61), the Federation of Arab Republics (1972-77), the Syrian domination of Lebanon (1976-2005), and the Iraqi annexation of Kuwait (1990-91).
इसके साथ ही। वास्तव में अरब संघ बनाने का प्रयास विशेष रूप से मिस्र और सीरिया के मध्य ( 1958 से 61 के मध्य) संयुक्त अरब गणतंत्र का प्रयास साथ ही कुछ और कम महत्व के प्रयास जैसे अरब महासंघ ( 1958) , संयुक्त अरब राज्य ( 1958 से 61) , अरब गणतंत्र महासंघ (1972 से 77) , लेबनान पर सीरिया का नियंत्रण ( 1976 से 2005) तथा कुवैत पर कब्जा करने का इराक का प्रयास ( 1990 1991) - More interestingly, the book demonstrates how easily a prominent analyst can misread the big picture. As suggested by its title, one theme concerns the existence of a single Arab people from Morocco to Iraq, a people so tradition bound that Stewart resorts to an animal analogy: “the Arabs possess a distinctive common culture which they can no more throw off than a hummingbird can change its nesting habits to those of a thrush.” Ignoring the Arabs' failed record to unify their countries, Stewart predicted that “whatever happens, the forces for [Arab] union will remain.” Hardly: that urge died not long after 1962 and has long remained defunct, as has its shallow premise that the Arabic language alone defines a people, ignoring history and geography.
जैसा कि इसके शीर्षक से स्पष्ट है कि पुस्तक की विषयवस्तु मोरक्को से इराक तक एक अरब जन का अस्तित्व है ऐसे लोग जो कि इस प्रकार परम्परा से आबद्ध हैं कि स्टीवर्ट ने पक्षी इसकी तुलना करते हुए लिखा है, “ अरबवादियों की एक अलग सामान्य संस्कृति है जिसे वे इसे हमिंग पक्षी के घोंसले की भाँति चाह कर भी हर बार फेंक नहीं सकते” अरबवासियों द्वारा अपने देशों को एक रख पाने में असफल रहने के पिछले रिकार्ड की अवहेलना करते हुए स्टीवर्ट भविष्यवाणी करते हैं कि, “ कुछ भी हो अरब संघ की शक्ति बनी रहेगी”। 1962 के बाद शायद ही ऐसा सम्भव रह सका कि अरबी भाषा ही केवल जन की परिभाषा कर सकी और इतिहास और भूगोल नकार दिये गये।